JE ने बिना एस्टीमेट ट्याला में खिंचवाई थी विद्युत लाइन अधिकारियों ने मामला दबाया

संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़। अवैध वसूली में एंटी करप्शन की टीम के हत्थे चढ़ने वाले अवर अभियंता ने ट्याला में बिना एस्टीमेट लाइन बनवाकर कनेक्शन बांट दिए थे। इस मामले में तत्कालीन एसडीओ ने शिकायत भी की थी। लेकिन पूर्व में निलंबित अधीक्षण अभियंता ने जेई के कारनामों को दबा दिया। धीरखेड़ा ग्रामीण बिजलीघर के अवर अभियंता अनिल कुमार को एंटी करप्शन की टीम ने बुधवार को व्यावसायिक कनेक्शन देने के नाम पर 15 हजार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। आरोपी अवर अभियंता पर पहले भी अवैध वसूली के आरोप लगे थे। मेरठ रोड पर नलकूप की सप्लाई से उसने एक होटल को भी आपूर्ति दे दी थी। हालांकि मामला खुलने पर उसने मीटर उतरवा दिया था।

इतना ही नहीं ट्याला में अवैध लाइन बनाकर निगम को लाखों का चूना भी लगाया। तत्कालीन एसडीओ ने जेई के खिलाफ उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी। लेकिन तत्कालीन अधीक्षण अभियंता यूके सिंह ने मामला दबा दिया। ऐसी ही अनियमितताओं पर अधीक्षण अभियंता का भी निलंबन हो चुका है। हालांकि, अब उपभोक्ता को व्यावसायिक कनेक्शन देने के नाम पर 15 हजार की वसूली के दौरान एंटी करप्शन की टीम ने जेई को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से निगम में फिर भूचाल आ गया है। क्योंकि कई अन्य अवर अभियंताओं पर भी हाल ही में उगाही के आरोप लगे हैं। इस मामले में अधिकारियों को भी ज्ञापन सौंपे गए हैं।

  • व्यावसायिक कनेक्शन देने के लिए रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन की टीम बुधवार को किया था गिरफ्तार.

निगम के कार्यों में पूरी तरह पारदर्शिता बरती जाएगी। इसमें लापरवाही करने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बड़े कनेक्शन की निगरानी खुद भी करेंगे। – अवनीश कुमार, अधीक्षण अभियंता ।

दिल्ली रोड पर कनेक्शन का मामला गरमाया

दिल्ली रोड पर एक बड़े व्यावसायिक कनेक्शन देने का मामला भी निगम के अधिकारियों के बीच गरमा रहा है। दरअसल, करीब 51 किलोवाट के कनेक्शन को लेकर कुछ लेनदेन की शिकायत हुई है। अधिकारियों को रिश्वत का लालच देकर गलत तरीके से एस्टीमेट बनवाने का प्रयास किया गया। लेकिन निचले स्तर पर बात न बनने पर उक्त अधिकारी को पैसे तक वापस करने पड़े हैं, वहीं इस लेनदेन का माध्यम बने व्यक्ति की भी निगम में छवि खूब धूमिल हो रही है। आरोपी पर अधिकारियों के नाम पर पहले भी अवैध वसूली के आरोप हैं। निगम के अधिकारी अब मामले में आरोपी के विभाग के उच्चाधिकारियों तक शिकायत करने की बात कह रहे हैं।

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