उपभोक्ताओं के Rs.13.33 करोड़ दबाए है मध्यांचल

प्रिंसिपल अकाउंट जनरल की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा

महीनों बाद जारी किए बिजली कनेक्शन, हर्जाने में फूटी कौड़ी भी नहीं दी – सुशील कुमार, लखनऊ | मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के जिम्मेदारों ने वीते चार साल में करीब 1.89 लाख उपभोक्ताओं को देरी से बिजली कनेक्शन जारी किया, लेकिन किसी को भी देरी का हर्जाना नहीं दिया। इस तरह इन उपभोक्ताओं को अपने हक के 13.33 करोड़ रुपये अब तक नहीं मिले हैं। यही नहीं, अगर जिम्मेदारों ने ये कनेक्शन वक्त पर जारी किए होते तो उप्र पावर कॉपोरेशन के विजली विल के मद में कम से कम करीब 14 करोड़ रुपये का राजस्व मिला होता । यह हकीकत प्रिंसिपल अकाउंट जनरल (ऑडिट) की रिपोर्ट में सामने आई है।

ऑडिट विभाग ने इसी साल 13 मई को 2020 से 2024 तक की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताविक, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों ने विजली कनेक्शन जारी करने में बड़े पैमाने पर लापरवाही की, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी। कई उपभोक्ताओं को आवेदन के बाद कनेक्शन के लिए तीन से चार साल तक इंतजार करना पड़ा।

झटपट पोर्टल पर भी सवाल

यूपी सरकार ने मार्च 2019 में झटपट विजली कनेक्शन योजना लॉन्च की थी। दावा किया गया था कि आवेदन के महज दस दिन में कनेक्शन मिल जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट पोर्टल लॉन्च होने के बाद की है। ऐसे में योजना भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

उपभोक्ता परिषद ने जताई नाराजगी

उपभोक्ताओं को देरी से कनेक्शन के एवज में दिए जाने वाले हजाने की रकम दवाने पर उप राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी नाराजगी जताई है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि अगर जिम्मेदार खुद हर्जाना नहीं देते तो नियामक आयोग में याचिका दायर की जाएगी।

30 दिन में कनेक्शन नहीं तो रोजाना 50 रुपये मुआवजा

यूपी इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमिशन-2019 के मुताबिक, आवेदन के 30 दिन में बिजली कनेक्शन हो जाना चाहिए। इससे ज्यादा समय लगने पर आवेदक को प्रतिदिन 50 रुपये की दर से हर्जाना मिलना चाहिए।

इन बिंदुओं पर मांगा जवाब :

प्रिंसिपल अकाउंट जनरल ने मध्यांचल के एमडी से मुआवजा न देने और लापरवाही पर विद्युत कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई न होने सहित कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

  • आवेदक की ओर से पूरी रकम जमा करने के बाद भी कनेक्शन में देरी के क्या कारण हैं ?
  • क्या उपभोक्ता सेवाओं में चूक या दे कंपनियों ने हर्जाने के भुगतान की जानकारी दी या समाचार पत्रों में प्रकाशन करवाया ?
  • कनेक्शन में देरी पर उपभोक्ताओं ने कितने सवाल उठाए ?
  • क्या देरी पर उपभोक्ता को कंपनी की ओर से कोई हर्जाना दिया गया है ?
  • हर्जाने के दावे के लिए ऑनलाइन सुविधा न होने का क्या कारण है ?

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