संविदा कर्मियों ने आस्तीन और अफसरों ने चढ़ाई त्योरी

जनवाणी संवाददाता, मेरठ | तबादला नीति को लेकर पीवीवीएनएल के संविदा कर्मचारी और उच्च पदस्थ अफसर आमने-सामने हैं। संविदा कर्मियों ने तबादला नीति के विरोध में सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है। जबकि पीवीवीएनएल का कहना है कि नौकरी करनी है तो जो आदेश लखनऊ से आया है, उसको मनना तो पड़ेगा। इस मुद्दे को लेकर टकराव के आसार साफ नजर आ रहे हैं। वहीं, आदेश में कहा गया कि जो संविदा कर्मचारी तीन साल से ज्यादा एक ही बिजलीघर पर जमे हैं, उनका तबादला किया जाएगा। पावर कॉरपोरेशन चेयरमैन ने निर्देश के बाद पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने इसका आदेश सभी अधीक्षण अभियंताओं को जारी कर दिया है। जल्द ही दूसरी बिजली कंपनियां भी इस संबंध में आदेश जारी करेंगी। अभी तक तबादला नहीं होता था। संविदाकर्मियों और टीजी -2 कर्मियों का तबादला नहीं होता था। वे जिस उपकेन्द्र पर तैनात रहते हैं। उन्हें वहीं तैनात रखा जाता था। पावर कॉरपोरेशन चेयरमैन के निर्देश के मुताबिक, जो संविदाकर्मी एक ही उपकेन्द्र पर तीन साल से अधिक समय से तैनात हैं, उसे हटाया जाए। इसी तरह एक उपकेन्द्र पर 5 साल से अधिक समय से तैनात टीजी -2 कर्मियों को हटाया जाएगा। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि कोई भी संविदा कर्मी उस उपकेन्द्र में नहीं तैनात होगा कि जिस उपकेंद्र के दायरे में उसका घर होगा।

  • एक-दूसरे को पावर दिखाने को अमादा है बिजली कर्मी और अफसर.
  • नीति को संविदा कर्मियों की ना, बोले- पहले मानो हमें स्थायी, फिर तबादला.

संविदा कर्मियों की ना

वहीं, दूसरी ओर चेयरमैन के इस आदेश को संविदा कर्मियों ने मानने से साफ इंकार कर दिया है। निविदा संविदा कर्मचारी सेवा समिति के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह का तर्क है। कि बिजली महकमे में हर साल संविदा कर्मचारियों का नया ठेकेदार आता है। जब हर साल नया ठेकेदार होगा तो फिर एक संविदा कर्मचारी एक बिजली घर पर भला तीन साल कैसे काम करता माना जा सकता है। जब नेया ठेकेदार आता है तो वो संविदा कर्मचारी से नया अनुबंध भी करता है। भूपेन्द्र सिंह का कहना है कि यदि स्थायी कर्मचारी की मानिंद तबादले करने हैं। तो संविदा कर्मचारियों को पहले स्थायी करो फिर कहीं भी तबादला करो।

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