बिजली कर्मी रिश्वत के आरोप से दोषमुक्त

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नोएडा, वरिष्ठ संवाददाता। विद्युत निगम के नगरीय परीक्षण खंड मीटर- दो में तैनात टीजी-टू प्रवीण कुमार को रिश्वत मांगने के मामले में जांच अधिकारियों ने क्लीन चिट दे दी। एक उपभोक्ता ने 20 जून 2023 को सेक्टर-40 में मीटर बदलने के लिए टीजी-टू प्रवीण कुमार और टिंकू गिरी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। इस मामले में सर्किल स्तर पर अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता की टीम को जांच सौंपी गई। इसमें प्रवीण कुमार को दोष मुक्त करार दिया गया है।

अधिशासी अभियंता ग्रेटर नोएडा और अधीक्षण अभियंता सर्किल दो ने मंगलवार देर शाम को जांच रिपोर्ट में प्रवीण कुमार को रिश्वत मांगने के आरोप से दोष मुक्त करार दिया। उनके निलंबन, तबादला और अन्य सुविधाओं को तुरंत प्रदान करने की सिफारिश की। इसके अलावा पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक स्तर से भी एक टीम बनाकर मुख्य अभियंता द्वारा कालिख पोते जाने और रिश्वत मांगने के मामले में जांच कराई गई। इसमें मुख्य अभियंता के खिलाफ रिपोर्ट यूपीपीसीएल के चेयरमैन को सौंप दी गई है।

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शुरू से विरोध जताता रहा पीड़ित : इस मामले में पीड़ित टीजी दो प्रवीण कुमार ने अपने साथ हुए अन्याय को कुमार ने अपने साथ हुए अन्याय को लेकर शुरू से विरोध जताता रहा। से विरोध जताता रहा। वह शुरू से ही रिश्वत मांगने के आरोप को गलत बताते रहे, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। उन्हें एक तरफा किसी ने नहीं सुनी। उन्हें एक तरफा फैसले में आरोपी करार दिया गया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय थाने में भी शिकायत दी। जिस पर पुलिस ने जांच का हवाला देते हुए आज तक केस दर्ज नहीं किया।

न्यायालय और मानवधिकार आयोग से लगाई गुहार : पीड़ित प्रवीण कुमार ने मामले में न्यायालय, मानवाधिकार आयोग, मेरठ मुख्यालय, यूपीपीसीएल के चेयरमैन कार्यालय से भी निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई। इसी दौरान कोर्ट के आदेश से पहले ही मुख्य अभियंता व पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों ने प्रवीण के निलंबन को विभाग की अंदरूनी जांच का हवाला देते हुए बहाल कर दिया और दादरी क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया।

मुख्य अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की मांग

पीड़ित ने न्यायालय और विद्युत निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई है कि मुख्य अभियंता राजीव मोहन ने उन पर रिश्वत मांगने के झुठे आरोप लगाकर मानसिक व सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया है। उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता और गाली गलौज की है, जिसके लिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि मेरठ मुख्यालय से लेकर यूपीपीसीएल मुख्यालय तक रिपोर्ट पहुंचने के बाद भी अभी तक इस दिशा में मुख्य अभियंता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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